
हाईटेंशन तारों के नीचे लग रहीं कक्षाएं, गेट के पास लगे खंभे और ट्रांसफॉर्मर
तेजस्वी संगठन ट्रस्ट।
चीफ़ ब्यूरो कमलेश पाण्डेय
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सोनभद्र। नौनिहालों की सुरक्षा को लेकर जिम्मेदार गंभीर नहीं हैं। तभी तो बच्चे कहीं जर्जर भवनों में पढ़ने के लिए मजबूर हैं तो कहीं हाईटेंशन तार के नीचे कक्षाएं लगाई जा रही हैं। जिले में 40 से ज्यादा स्कूल ऐसे हैं, जिनके ऊपर से बिजली के हाईटेंशन तार गुजर रहे हैं। कई विद्यालयों के गेट के पास ही खंभे और ट्रांसफॉर्मर लगे हैं। उसे सुरक्षित ढंग से घेरा भी नहीं गया है। ऐसे में अभिभावक और शिक्षक बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंतित रहते हैं।जिले में 2061 परिषदीय विद्यालय हैं। इनमें करीब सवा दो लाख से अधिक बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं। अभिभावक अपने बच्चों को अच्छी तालीम देने के लिए स्कूल भेजते हैं, लेकिन वहां की व्यवस्थाओं के चलते हर वक्त उनके मन में चिंता बनी रहती हैं। स्कूल भवन, गेट, बाउंड्री तो जर्जर है ही, परिसर से हाईटेंशन तार भी गुजर रहे हैं। तेज हवा चलने पर इन ढीले और जर्जर तारों में स्पार्किंग से बच्चे सहम जाते हैं। यही कारण है कि शिक्षक भी उन्हें कक्षाओं से बाहर खेलने नहीं भेजते। रॉबर्ट्सगंज, करमा, चतरा, दुद्धी, चोपन, म्योरपुर ब्लॉक में ऐसे स्कूलाें की बड़ी संख्या है। विभागीय आंकड़ों के मुताबिक करीब 50 विद्यालय ऐसे हैं। इनके परिसर व ऊपर से तार-पोल हटाने के लिए पत्राचार किया गया है, मगर नतीजा सिफर है।
डर से कमरे में ही खेलते हैं बच्चे
करमा ब्लॉक के कंपोजिट विद्यालय तकिया दरगाह में 268 बच्चे पंजीकृत हैं। विद्यालय का भवन और सुविधाएं अच्छी हैं, लेकिन खेल मैदान में ही बिजली का पोल व ट्रांसफॉर्मर लगा हुआ है। इससे खींचे 11 हजार वोल्ट के तार परिसर से गुजरते हैं। ऐसे में छुट्टी के समय में भी बच्चों को खेलने के लिए कक्षाओं के बाहर नहीं जाने दिया जाता। खेल मैदान में तार व पोल से खतरे को देखते हुए ही यहां खेल गतिविधियां नहीं हो पाती। गांव की क्षेत्र पंचायत सदस्य रेनू सिंह ने बताया कि कई बार तार को परिसर से हटाने के लिए विभाग को सूचित किया गया है। बीईओ बृजेश सिंह ने बताया कि इसकी सूचना उच्चाधिकारियों को दी गई है। तार हटाने की प्रक्रिया चल रही है।
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केस दो::
परिसर में ही लगा पोल, दौड़ रहा 11 हजार वोल्ट का करंट
रॉबर्ट्सगंज नगर से सटे प्राथमिक विद्यालय सहजौर में लापरवाही का अजब नजारा है। यहां परिसर में बिजली का पोल खड़ा है। इस पोल से 11 हजार वोल्ट की लाइन खींची गई है। जहां पोल लगा है, उसी के ठीक सामने बच्चों की कक्षाएं भी हैं। तेज हवा चलने पर तारों में स्पार्किंग से कई बार चिंगारी परिसर में गिरती है। बच्चे और शिक्षक भयभीत रहते हैं। रॉबर्ट्सगंज ब्लॉक के ही छपका में डीआईओएस कार्यालय के ठीक पीछे स्थित विद्यालय के ऊपर पॉवर ग्रिड का तार गुजरा है। विद्यालय परिसर के ठीक बगल में एलटी लाइन का भी तार गुजर रहा है।
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केस तीन::
टेढे खंभे के नीचे से रोज गुजरते हैं बच्चे
रॉबर्ट्रसगंज नगर में जिला पंचायत रोड पर चिराग तले अंधेरा की कहावत चरितार्थ हो रही है। इस मार्ग पर तीन परिषदीय विद्यालय संचालित है। राजकीय बालिका इंटर कॉलेज, राजा शारदा महेश इंटर कॉलेज, विमला इंटर कॉलेज भी है। जिला पंचायत कार्यालय के ठीक बगल में बिजली का पोल टेढ़ा हो गया है। इस पोल पर 11 हजार वोल्ट के तार खींचे गए हैं। इन तारों के नीचे से हर रोज सैकड़ों छात्र-छात्रा गुजरते हैं। बावजूद जिम्मेदार इससे बेखबर बने हुए हैं।
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केस चार::
कंपोजिट विद्यालय के ऊपर से 11 हजार वोल्ट का तार
चतरा ब्लॉक के सेहुआं गांव में भी कंपोजिट विद्यालय के ठीक ऊपर से हाईटेंशन तार गुजरा हुआ है। इस विद्यालय में विद्यार्थियों की संख्या डेढ़ सौ से अधिक है। परिसर के ऊपर से ही हाईटेंशन तार होने से हमेशा खतरा बना रहता है। इसी गांव में विद्यालय से सटे हनुमान मंदिर के पास ट्रांसफॉर्मर जमीन पर रखा हुआ है
बच्चों की सुरक्षा प्राथमिकता में है। कई जर्जर भवनों को ध्वस्त कराया गया है। अभी भी पुराने व जर्जर भवन चिह्नित कराए जा रहे हैं। जिन विद्यालयों के ऊपर से बिजली के तार गुजरे हैं और आसपास खंभे लगे हैं, उन्हें चिह्नित कर बिजली निगम के अधिकारियों को पत्र भेजा गया है। जल्द ही तार और खंभे हटवाए जाएंगे। -मुकुल आनंद पांडेय, बीएसए