
आखिर क्यों बात-बात पर दे देते हैं जान…..
तेजस्वी संगठन ट्रस्ट।
–जनपद में खुदकुशी करने वालों का बढ़ रहा ग्राफ़
–जनवरी -फरवरी माह में डेढ़ दर्जन से अधिक हुईआत्म हत्याएं
रिज़वान सिद्दीकी
बिजनौर। ज़माने की बदलती *तस्वीर* बयार रिश्तों को पहले से ही तोड़ रही थी, लेकिन पिछले कुछ महीनों से इस बदलाव का असर अब जिंदगानियों के दरकने पर भी साफ़ नज़र आ रही है। जिंदगानी दरकने के इस सिलसिले में महिलाओं की संख्या ज्यादा है।जनपद में आत्महत्याओं का ग्राफ तेजी के साथ बढ़ रहा है । जो चिंतन का विषय है । ग्रह क्लेश, प्रेम प्रसंग, दहेज़ उत्पीड़न, आर्थिक तंगी के चलते नारी एवं पुरुष मौत को गले लगा रहे है।
आजकल रिश्तों की डोर इतनी कमजोर होती जा रही है कि उसकी कीमत महिलाएं व पुरुष जान देकर चुका रहे हैं। इस वर्ष जनवरी – फ़रवरी माह में खुदकुशी की एक दर्जन से अधिक मामलों पर गौर करें तो चोंकाने वाली बात यह है कि इसमें सबसे अधिक खुदकुशी के केसेज उनके हैं जिन्होंने परेशानी दूर करने के लिए अपनी जान दे दी है। आज की भागम भाग जिंदगी में लोगों की संवेदना और सहनशीलता कहीं खो गई है। जिसके चलते लोग आत्महत्या कर रहे हैं। इसका सबसे बड़ा कारण आर्थिक तंगी इच्छित रोजगार न मिलना या प्यार में धोखा है।आये दिन होती खुदकुशी पर एडवोकेट , समाजसेवी व राजनीतिज्ञ महिलाओं की राय कुछ इस तरह है।
चेंज क्लाइमेक्स बढ़ा रहा खुदकुशी की वारदातें ः रुची
वीरा
सपा सांसद रुची वीरा का कहना है कि जिले में बढ़ रही आत्महत्याओं में इंसान में हो रहे क्लाइमेक्स चेंज हार्मोन का भी प्रभाव पढ़ रहा है। इसके अलावा मनुष्य मंहगाई के चलते आपनी आकांक्षाओं की पूर्ति ही नहीं कर पाता है। जिसके चलते ग्रह क्लेश और खुदकुशी की घटनाएं होती हैं। उनका कहना है इंसान को जितनी लंबी चादर उतने ही पैर पसारने चाहिए, ताकि परेशानियां घर न करें।
तनाव के चलते लगा देते हैं जान की बाजी ः नजाकत अली
कांग्रेस नेता नजाकत अली ने बताया कि आत्महत्याओं का बढ़ते ग्राफ़ का कारण गुस्सा है। गुस्से में इंसान अपने विवेक से काम नहीं करता, जिसके चलते उसके सोचने समझने की शक्ति क्षीण हो जाती है। वह छोटी-छोटी परेशानियों में भी आपस में क्लेश कर लेते हैं, जिसके चलते मामला खुदकुशी तक पहुंच जाता है।
भौतिकतावादी रुझान अहम वजह ः रीता भुईयार एडवोकेट
सोशल वर्कर रीता भुईयार एडवोकेट का कहना है कि आज के ग्लोबलाइजेशन के दौर में लोगों ने सहनशीलता को खो दिया है,यह सब भौतिकवादी रुझान की वजह है। इसके अलावा मंहगाई और एकल फैमली भी दिन-प्रतिदिन हो रही आत्महत्याओं की सबसे बड़ी वजह है। इसके अलावा संस्कार- संस्कृति और माहौल भी इन घटनाओं में प्रभावित होती है। अब वह समय आ गया है कि पुनः संयुक्त परिवार प्रथा को अपनाया जाए। इससे लोगों को साथ मिलेगा और ऐसी घटनाएं रुकेंगी।
आर्थिक तंगी से बढ़ता ग्राफ़ -ः चिंकी गुप्ता
भाजपा झालू मंडल अध्यक्ष चिंकी गुप्ता ने आए दिन होने वाली आत्महत्याओं का मुख्य कारण आर्थिक तंगी बताया है। उन्होंने कहा कि मंहगाई इतनी बढ़ गई है कि लोग आसानी से सरबाइब नहीं कर पा रहे हैं। जिसके चलते हमेशा मानसिक तनाव की स्थिति बनती है वहीं तनाव महिलाओं की सोचने की क्षमताओं को क्षीण कर देता है। जिसके चलते वह आत्महत्या कर लेती हैं।