
आशाओं की हड़ताल से प्रभावित हुआ संचारी रोग नियंत्रण अभियान, अब 15 नवंबर तक बढ़ाई गई अवधि एक महीने में निर्धारित लक्ष्य
तेजस्वी संगठन ट्रस्ट।
चीफ ब्यूरो कमलेश पाण्डेय
8382048247
पूरे नहीं होने पर स्वास्थ्य विभाग ने फिर संभाली कमान, 1700 टीमें गांवों में उतरीं; बेमौसम बारिश के बाद डेंगू-मलेरिया का खतरा बढ़ने की आशंका
सोनभद्र। जिले में संक्रामक बीमारियों की रोकथाम और आमजन को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से चलाया गया संचारी रोग नियंत्रण अभियान निर्धारित समय में अपने सभी लक्ष्य हासिल नहीं कर सका। अक्टूबर महीने में आशा कार्यकर्ताओं और संगिनियों की हड़ताल के साथ ही स्वास्थ्य विभाग के सामने आईं मैदानी स्तर की विभिन्न कार्यगत चुनौतियों के कारण अभियान की गतिविधियां प्रभावित हुईं। ऐसे में अधूरे कार्यों को पूरा करने और ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य जागरूकता की मुहिम को गति देने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने अभियान की अवधि 15 दिन और बढ़ा दी है। 30 अक्टूबर को समाप्त होने वाला अभियान अब 15 नवंबर तक संचालित किया जाएगा। इसके लिए जिले में गठित करीब 1700 टीमों को दोबारा सक्रिय करते हुए गांवों और शहरी क्षेत्रों में घर-घर पहुंचने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
अभियान की अवधि बढ़ाए जाने के बाद स्वास्थ्य विभाग के सामने सबसे बड़ी चुनौती निर्धारित समय में छूटे हुए घरों तक पहुंचना, बुखार से पीड़ित लोगों को चिह्नित करना, संदिग्ध मरीजों की जांच और उपचार सुनिश्चित कराना तथा लोगों को संक्रामक बीमारियों से बचाव के प्रति जागरूक करना है। हालांकि, सवाल यह भी उठ रहा है कि जब एक महीने के निर्धारित अभियान में सभी लक्ष्य पूरे नहीं हो सके तो अतिरिक्त 15 दिनों में स्वास्थ्य विभाग कितनी सफलता हासिल कर पाएगा।
दरअसल, शासन के निर्देश पर जनपद में एक से 30 अक्टूबर तक विशेष संचारी रोग नियंत्रण अभियान चलाया गया था। इसके तहत स्वास्थ्य विभाग की टीमों को घर-घर जाकर लोगों को संचारी एवं संक्रामक रोगों के लक्षण, बचाव और उपचार की जानकारी देने के साथ ही बुखार से पीड़ित मरीजों की पहचान करने की जिम्मेदारी दी गई थी। अभियान का उद्देश्य केवल लोगों को जागरूक करना ही नहीं, बल्कि संभावित रोगियों को समय रहते चिह्नित कर स्वास्थ्य केंद्रों तक पहुंचाना और बीमारी के प्रसार को रोकने के लिए जरूरी कदम उठाना भी था। इसके साथ ही गांवों में साफ-सफाई, जलभराव की समस्या, मच्छरों के प्रजनन स्थलों और गंदगी वाले स्थानों पर विशेष निगरानी रखने पर जोर दिया गया था।
आशाओं की हड़ताल से प्रभावित हुईं मैदानी गतिविधियां
अक्टूबर महीने में जिले की बड़ी संख्या में आशा कार्यकर्ता और आशा संगिनियां अपनी विभिन्न मांगों को लेकर आंदोलनरत थीं। मानदेय में बढ़ोतरी, नियमितीकरण सहित अन्य मांगों को लेकर कार्य बहिष्कार और विरोध प्रदर्शन किए जाने से स्वास्थ्य विभाग के सामने ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित योजनाओं और घर-घर पहुंचने वाली स्वास्थ्य सेवाओं को सुचारु बनाए रखने की चुनौती खड़ी हो गई थी। संचारी रोग नियंत्रण अभियान में आशा कार्यकर्ताओं की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है, क्योंकि वे गांवों में परिवारों से सीधे संपर्क कर बुखार के मरीजों की जानकारी जुटाने, बीमारी के लक्षणों के प्रति जागरूक करने और जरूरतमंदों को स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाती हैं।
इसी बीच 24 अक्टूबर को मिशन निदेशक स्तर पर हुई वार्ता के बाद आशा कार्यकर्ताओं ने अपना आंदोलन स्थगित करते हुए 25 अक्टूबर से काम पर लौटने का निर्णय लिया था। लेकिन तब तक अभियान का अधिकांश निर्धारित समय बीत चुका था। ऐसे में शुरुआती दिनों में मैदानी गतिविधियों के प्रभावित रहने और बाद में कामकाज सामान्य होने के बीच अभियान के निर्धारित लक्ष्यों को पूरा करना स्वास्थ्य विभाग के लिए चुनौतीपूर्ण बन गया।
1700 टीमों को दोबारा सौंपी गई जिम्मेदारी
अभियान की अवधि बढ़ाए जाने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने शेष कार्यों को पूरा कराने के लिए अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। जिले में गठित लगभग 1700 टीमों को गांवों में दोबारा सक्रिय किया गया है। इन टीमों के माध्यम से एक से 15 नवंबर तक घर-घर जाकर लोगों को संचारी रोगों से बचाव के उपाय बताए जाएंगे। अभियान के दौरान जिन घरों तक स्वास्थ्य विभाग की टीमें नहीं पहुंच पाई थीं, वहां विशेष रूप से संपर्क कर सर्वे और जागरूकता संबंधी गतिविधियां पूरी करने पर जोर रहेगा।
इसके अलावा बुखार से पीड़ित व्यक्तियों की पहचान, संदिग्ध मरीजों की जांच, आवश्यक उपचार और स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ने का काम भी प्राथमिकता में रखा गया है। टीमों को लोगों को यह समझाने की जिम्मेदारी दी गई है कि किसी भी प्रकार का बुखार होने पर लापरवाही न बरतें और तत्काल नजदीकी सरकारी स्वास्थ्य केंद्र पर पहुंचकर जांच कराएं। समय रहते बीमारी की पहचान होने से गंभीर स्थिति और संक्रमण के प्रसार को रोकने में मदद मिल सकती है।
बेमौसम बारिश ने बढ़ाई स्वास्थ्य विभाग की चिंता
पिछले दिनों हुई बेमौसम बारिश के बाद जिले में संचारी रोगों का खतरा बढ़ने की आशंका ने स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है। बारिश के कारण कई स्थानों पर पानी जमा होने, नालियों में गंदगी और घरों के आसपास जलभराव की स्थिति बनने से मच्छरों के पनपने के लिए अनुकूल परिस्थितियां पैदा हो सकती हैं। इसका असर डेंगू, मलेरिया और अन्य मच्छरजनित बीमारियों के रूप में सामने आने की आशंका रहती है। इसके अलावा मौसम में बदलाव के कारण वायरल बुखार और अन्य मौसमी बीमारियों के मरीजों की संख्या भी बढ़ सकती है।
इसी को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग की ओर से लोगों को अपने घरों और आसपास पानी जमा नहीं होने देने की सलाह दी जा रही है। कूलर का पानी नियमित रूप से बदलने, गमलों और पुराने बर्तनों में पानी जमा न होने देने, छतों और आसपास पड़े कबाड़ की सफाई करने तथा नालियों को साफ रखने की अपील की जा रही है। लोगों को मच्छरों से बचाव के लिए पूरी बांह के कपड़े पहनने और सोते समय मच्छरदानी का इस्तेमाल करने के प्रति भी जागरूक किया जा रहा है।
आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की भूमिका अहम
संचारी रोग नियंत्रण अभियान को सफल बनाने में आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है। ये कार्यकर्ता घर-घर जाकर परिवारों को स्वच्छता, साफ पेयजल, जलभराव से बचाव और मच्छरों के प्रजनन को रोकने के उपायों की जानकारी देती हैं। खासकर बच्चों, गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों को संक्रमण से बचाने के लिए विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी जाती है।
अभियान के तहत डेंगू, मलेरिया, कालाजार सहित अन्य संचारी रोगों के लक्षणों की जानकारी देने और संभावित मरीजों को समय से उपचार उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग की अपील है कि लगातार बुखार रहने, शरीर में दर्द, कमजोरी या अन्य असामान्य लक्षण दिखाई देने पर स्वयं दवा लेने के बजाय चिकित्सकीय परामर्श लें। किसी भी मरीज को झाड़-फूंक या घरेलू उपचार के भरोसे छोड़ने के बजाय समय पर अस्पताल पहुंचाना जरूरी है।
अभियान की सफलता पर टिकी निगाहें
एक महीने तक चले अभियान के दौरान सामने आई चुनौतियों और अधूरे रह गए कार्यों को देखते हुए अतिरिक्त 15 दिन स्वास्थ्य विभाग के लिए काफी महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। अब विभाग के सामने केवल अभियान की अवधि बढ़ाना ही नहीं, बल्कि वास्तविक रूप से गांव-गांव तक पहुंचकर निर्धारित गतिविधियों को पूरा करने की जिम्मेदारी है। अभियान की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि 1700 टीमें कितनी सक्रियता से काम करती हैं और घर-घर तक स्वास्थ्य जागरूकता तथा जांच की सुविधाएं कितनी प्रभावी ढंग से पहुंच पाती हैं।
सीएमओ बोले- 15 नवंबर तक चलेगा अभियान
मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. रमेश कुमार मिश्रा ने बताया कि संचारी रोग नियंत्रण अभियान की अवधि 15 दिन बढ़ाई गई है। पहले यह अभियान एक से 30 अक्टूबर तक संचालित होना निर्धारित था, लेकिन अधूरे कार्यों को पूरा करने और अधिक से अधिक लोगों को संचारी रोगों के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से इसे अब 15 नवंबर तक जारी रखा जाएगा। उन्होंने बताया कि अभियान के तहत गठित टीमों को सक्रिय कर दिया गया है। सभी संबंधित कर्मचारियों को निर्देशित किया गया है कि वे घर-घर जाकर लोगों को बीमारियों से बचाव की जानकारी दें और संदिग्ध मरीजों की पहचान कर उन्हें समय से जांच एवं उपचार की सुविधा उपलब्ध कराएं।