
जनपद में अपंजीकृत एवं प्रतिबंधित कीटनाशी रसायनों के उपयोग पर रोक लगाने के लिए कृषि विभाग ने कड़ा रुख अपनाया है
तेजस्वी संगठन ट्रस्ट।
चीफ ब्योरों कमलेश पाण्डेय
8382048247
जिला कृषि रक्षा अधिकारी श्री वीरेन्द्र कुमार ने जनपद के सभी कीटनाशी विक्रेताओं, पेस्ट कंट्रोल ऑपरेटरों तथा संबंधित व्यापारियों को निर्देश जारी करते हुए कहा है कि अपंजीकृत अथवा प्रतिबंधित कीटनाशी रसायनों से युक्त किसी भी उत्पाद का विक्रय, भंडारण या उपयोग न किया जाए।
उन्होंने बताया कि विभाग के संज्ञान में आया है कि कुछ मच्छर भगाने वाली अगरबत्तियों एवं कॉइल उत्पादों में अपंजीकृत कीटनाशी रसायन डीमेफ्लुथ्रिन (Dimefluthrin) एवं मेपेफ्लुथ्रिन (Meperfluthrin) का प्रयोग किया जा रहा है। विशेष रूप से स्वीट नाइट, डायनासोर, श्री डेंगू किलर तथा कम्फर्ट ब्रांड की कुछ अगरबत्तियों एवं कॉइलों के संबंध में सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं। ये रसायन कीटनाशी अधिनियम, 1968 एवं कीटनाशी नियमावली, 1971 के तहत अनुमन्य नहीं हैं।
जिला कृषि रक्षा अधिकारी ने कहा कि ऐसे उत्पादों का उपयोग न केवल मानव स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है, बल्कि पर्यावरण पर भी प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है। साथ ही यह विधिक प्रावधानों का उल्लंघन भी है। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि कोई विक्रेता, पेस्ट कंट्रोल ऑपरेटर अथवा अन्य प्रतिष्ठान अपंजीकृत या प्रतिबंधित कीटनाशी युक्त उत्पादों का व्यापार, भंडारण अथवा उपयोग करते हुए पाया गया, तो उसके विरुद्ध कीटनाशी अधिनियम, 1968 एवं नियमावली, 1971 के तहत कठोर वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने सभी विक्रेताओं एवं संबंधित प्रतिष्ठानों से अपने स्टॉक का तत्काल सत्यापन करने तथा संदिग्ध या अपंजीकृत कीटनाशी युक्त उत्पादों की बिक्री तुरंत बंद करने की अपील की है।
जनसामान्य से भी अनुरोध किया गया है कि यदि किसी स्थान पर ऐसे संदिग्ध उत्पादों का विक्रय या उपयोग होता दिखाई दे, तो इसकी सूचना निकटतम कृषि रक्षा कार्यालय को दें, ताकि समय रहते आवश्यक जांच एवं कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।
कृषि विभाग ने जनहित में सभी नागरिकों से सुरक्षित एवं अधिकृत उत्पादों के ही उपयोग की अपील की है, जिससे स्वास्थ्य, पर्यावरण और कानून व्यवस्था की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।