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जिलाधिकारी के नेतृत्व में सोनभद्र ने रचा कीर्तिमान, खसरा फीडिंग में प्रदेश में 75वें से 5वें स्थान पर पहुंचा जनपद

जिलाधिकारी के नेतृत्व में सोनभद्र ने रचा कीर्तिमान, खसरा फीडिंग में प्रदेश में 75वें से 5वें स्थान पर पहुंचा जनपद


तेजस्वी संगठन ट्रस्ट।

 

चीफ ब्योरों कमलेश पाण्डेय

8382048247

सर्किल रेट निर्धारण की तैयारी में बड़ी सफलता, तीन दिनों में 75 प्रतिशत खसरा फीडिंग पूर्ण कर सोनभद्र बना प्रदेश का टॉप-5 जनपद

पारदर्शी मूल्यांकन सूची की दिशा में बड़ा कदम, जिलाधिकारी के निर्देशन में सोनभद्र ने प्रदेशीय रैंकिंग में लगाई लंबी छलांग

जनपद सोनभद्र में आगामी जुलाई माह से लागू होने वाली नई मूल्यांकन सूची (सर्किल रेट) के निर्धारण हेतु जिलाधिकारी श्री चर्चित गौड़ के निर्देशन में मूल्यांकन सूची के परीक्षा-पुनरीक्षण का कार्य तीव्र गति से किया जा रहा है। जिलाधिकारी के कुशल नेतृत्व, सतत अनुश्रवण एवं प्रभावी कार्ययोजना के परिणामस्वरूप जनपद ने एक उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। खसरा संख्याओं की ऑनलाइन फीडिंग के विशेष अभियान में मात्र तीन दिनों के भीतर लगभग 75 प्रतिशत कार्य पूर्ण कर लिया गया है, जिसके फलस्वरूप सोनभद्र जनपद प्रदेशीय रैंकिंग में 75वें स्थान से उछाल लेते हुए 5वें स्थान पर पहुंच गया है।

 

संपत्तियों के वैज्ञानिक एवं यथार्थ मूल्यांकन के लिए खसरा संख्याओं का विशेष महत्व है। इन्हीं के आधार पर भूमि की वास्तविक स्थिति तथा उसके मूल्य को प्रभावित करने वाले विभिन्न कारकों का आकलन किया जाता है। जिलाधिकारी के निर्देशानुसार जनपद की सभी तहसीलों में विशेष अभियान चलाकर खसरा संख्याओं की ऑनलाइन फीडिंग का कार्य युद्धस्तर पर कराया जा रहा है।

 

इस अभियान के अंतर्गत केवल खसरा संख्या ही नहीं, बल्कि प्रत्येक भूमि की अवस्थिति का विस्तृत विवरण भी दर्ज किया जा रहा है। यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि भूमि राष्ट्रीय राजमार्ग, राज्य राजमार्ग अथवा अन्य किस प्रकार की सड़क से संबद्ध है। साथ ही भूमि के 50 मीटर की परिधि में उपलब्ध आवासीय एवं व्यावसायिक गतिविधियों का भी विवरण संकलित किया जा रहा है। इन तथ्यों के आधार पर संपत्तियों का अधिक सटीक एवं पारदर्शी बाजार मूल्य निर्धारण संभव होगा।

 

जनपद स्तर पर उपनिबंधकों, राजस्व विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों के समन्वित प्रयासों से यह कार्य तेजी से संपादित किया जा रहा है। जिलाधिकारी श्री चर्चित गौड़ ने निर्देशित किया है कि मूल्यांकन सूची का निर्माण स्थानीय परिस्थितियों, भूमि की वास्तविक उपयोगिता एवं बाजार की स्थिति के अनुरूप किया जाए, जिससे आमजन को पारदर्शी, न्यायसंगत एवं व्यवहारिक व्यवस्था का लाभ प्राप्त हो सके।

 

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