
दहेज हत्या मामले में पति और सास को 10-10 साल की सजा, गर्भवती विवाहिता की मौत पर कोर्ट का कड़ा फैसला
तेजस्वी संगठन ट्रस्ट।
चीफ ब्योरों कमलेश पाण्डेय
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सोनभद्र। दहेज हत्या के एक चर्चित मामले में न्यायालय ने पति और सास को दोषी ठहराते हुए 10-10 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। न्यायाधीश एससी/एसटी एक्ट गोविंद मोहन की अदालत ने दोनों दोषियों पर 20-20 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। जुर्माना अदा न करने की स्थिति में उन्हें दो वर्ष का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, रायपुर थाना क्षेत्र के बिडर गांव निवासी ललिता देवी ने 27 मई 2024 को पुलिस में तहरीर देकर आरोप लगाया था कि उनकी पुत्री रागिनी की शादी 28 फरवरी 2024 को रायपुर निवासी तपेश्वर के साथ हुई थी। विवाह के बाद से ही ससुराल पक्ष द्वारा अपाची बाइक, सोने की चेन और एक लाख रुपये नकद दहेज की मांग को लेकर रागिनी को लगातार प्रताड़ित किया जा रहा था।
परिजनों ने बताया कि 21 मई 2024 को पंचायत और समझौते के बाद रागिनी को पुनः ससुराल भेजा गया था, लेकिन मात्र छह दिन बाद 27 मई को उसकी संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। घटना के समय रागिनी लगभग दो माह की गर्भवती थी, जिससे मामला और भी संवेदनशील हो गया।
मामले की जांच के दौरान पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मृतका के गले पर फंदे के निशान तथा ठुड्डी पर चोट के निशान पाए गए। इसके बाद रायपुर थाना पुलिस ने आईपीसी और दहेज प्रतिषेध अधिनियम की संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर विवेचना शुरू की। जांच में पर्याप्त साक्ष्य मिलने पर पुलिस ने पति तपेश्वर और उसकी मां उर्मिला के खिलाफ आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया।
सुनवाई के दौरान प्रस्तुत साक्ष्यों और गवाहों के बयान के आधार पर अदालत ने दोनों अभियुक्तों को दोषी करार दिया। न्यायालय ने आईपीसी की धारा 304बी (दहेज मृत्यु) के तहत दोनों को 10-10 वर्ष के कठोर कारावास और अर्थदंड की सजा सुनाई। अदालत ने यह भी आदेश दिया कि विचाराधीन अवधि के दौरान जेल में बिताया गया समय सजा में समायोजित किया जाएगा।
फैसले के बाद दोनों दोषियों को न्यायिक अभिरक्षा में लेकर जिला कारागार सोनभद्र भेज दिया गया। अदालत के इस निर्णय को दहेज उत्पीड़न और दहेज हत्या के मामलों में एक महत्वपूर्ण संदेश के रूप में देखा जा रहा है।