
एनसीएलटी की बड़ी मंजूरी: अडानी समूह करेगा जेपी एसोसिएट्स का अधिग्रहण, वेदांता की आपत्ति खारिज
तेजस्वी संगठन ट्रस्ट।
चीफ़ ब्यूरो: कमलेश पाण्डेय
मो.: 8382048247
नई दिल्ली। नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) की इलाहाबाद पीठ ने एक अहम फैसले में दिवालिया हो चुकी जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड (JAL) के अधिग्रहण के लिए अडानी एंटरप्राइजेज की 15,000 करोड़ रुपये से अधिक की समाधान योजना को मंजूरी दे दी है। इस दौरान वेदांता लिमिटेड द्वारा उठाई गई आपत्तियों को ट्रिब्यूनल ने खारिज कर दिया।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, एनसीएलटी ने संक्षिप्त आदेश जारी करते हुए समाधान योजना को स्वीकृति प्रदान कर दी है, जबकि विस्तृत आदेश अभी आना बाकी है। इस मंजूरी के साथ ही कंपनी के अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी और अडानी समूह धीरे-धीरे जेपी एसोसिएट्स की संपत्तियों पर नियंत्रण हासिल करेगा।
अडानी एंटरप्राइजेज ने बताया कि इस अधिग्रहण को कंपनी सीधे या किसी विशेष प्रयोजन वाहन (SPV) के माध्यम से पूरा कर सकती है। योजना के तहत लेनदारों को तय समयसीमा में भुगतान किया जाएगा, जिससे कंपनी को दिवालिया प्रक्रिया से बाहर निकालने का मार्ग प्रशस्त होगा।
हालांकि, वेदांता लिमिटेड, जिसके चेयरमैन अनिल अग्रवाल हैं, ने बोली प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए इसे पारदर्शिता के अभाव और ‘व्यावसायिक साजिश’ करार दिया था। बावजूद इसके, कानूनी जानकारों का मानना है कि एनसीएलटी की मंजूरी के बाद इस योजना को चुनौती देने के विकल्प सीमित रह जाते हैं, हालांकि वेदांता एनसीएलएटी में अपील कर सकती है।
इस समाधान योजना को वित्तीय लेनदारों का करीब 93 प्रतिशत समर्थन मिला, जो कि आवश्यक 66 प्रतिशत से काफी अधिक है। इसमें नेशनल एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनी लिमिटेड (NARCL) की निर्णायक भूमिका रही, जिसके पास 85.43 प्रतिशत वोटिंग अधिकार हैं। वहीं, यस बैंक के एक्सपोज़र का प्रतिनिधित्व करने वाली एसेट केयर एंड रिकंस्ट्रक्शन एंटरप्राइज ने इस योजना का विरोध किया।
अडानी की बोली को उसकी मजबूत भुगतान संरचना के चलते बढ़त मिली, जिसमें लगभग 6,000 करोड़ रुपये का तत्काल भुगतान और शेष राशि दो वर्षों में देने का प्रस्ताव शामिल है। इसके मुकाबले वेदांता की 12,505 करोड़ रुपये की बोली पांच वर्षों में भुगतान की शर्त पर आधारित थी।
हालांकि, कुल 5.44 लाख करोड़ रुपये के दावों के मुकाबले लेनदारों को मात्र करीब 2.8 प्रतिशत की वसूली ही हो पाएगी। इसके बावजूद इस सौदे के जरिए अडानी समूह को जेपी एसोसिएट्स की कई अहम परिसंपत्तियों पर नियंत्रण मिलेगा, जिनमें नोएडा और ग्रेटर नोएडा में करीब 3,985 एकड़ भूमि, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में 6.5 मिलियन टन सीमेंट उत्पादन क्षमता तथा जयप्रकाश पावर वेंचर्स लिमिटेड में 24 प्रतिशत हिस्सेदारी शामिल है।
यह अधिग्रहण अडानी समूह के सीमेंट और इंफ्रास्ट्रक्चर कारोबार के विस्तार में मील का पत्थर साबित हो सकता है। समूह की कंपनी अंबुजा सीमेंट्स वित्त वर्ष 2028 तक अपनी उत्पादन क्षमता को 109 मिलियन टन से बढ़ाकर 155 मिलियन टन करने की दिशा में काम कर रही है।
इसके अतिरिक्त, जेपी एसोसिएट्स के पास रियल एस्टेट की कई बड़ी परियोजनाएं भी हैं, जिनमें ग्रेटर नोएडा का जेपी ग्रीन्स, नोएडा का विशटाउन और जेवर एयरपोर्ट के पास विकसित हो रहा इंटरनेशनल स्पोर्ट्स सिटी प्रमुख हैं। साथ ही एनसीआर, मसूरी और आगरा में होटल संपत्तियां भी कंपनी के पोर्टफोलियो में शामिल हैं।
गौरतलब है कि जयप्रकाश एसोसिएट्स को जून 2024 में 55,000 करोड़ रुपये से अधिक के कर्ज में चूक के बाद दिवालिया प्रक्रिया में भेजा गया था। इसके बाद बैंकों ने लगभग 12,700 करोड़ रुपये का कर्ज NARCL को ट्रांसफर कर दिया, जिससे वह सबसे बड़ा लेनदार बन गया।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह फैसला न केवल दिवालिया समाधान प्रक्रिया के लिहाज से अहम है, बल्कि इससे अडानी समूह को इंफ्रास्ट्रक्चर, सीमेंट और रियल एस्टेट सेक्टर में अपनी पकड़ और मजबूत करने का अवसर मिलेगा।