
जब भक्तों पर अत्याचार होता है तब निराकार परमात्मा का अवतार होता है: मनीष शरण जी महाराज
तेजस्वी संगठन ट्रस्ट।
चीफ़ ब्यूरो कमलेश पाण्डेय
8382048247
– गायत्री भवन तेजनगर, उरमौरा में चल रहे श्रीमद्भागवत कथा सुनने को जुटे भक्तगण
फोटो:
सोनभद्र। गायत्री भवन तेजनगर, उरमौरा में चल रहे श्रीमद्भागवत कथा में पांचवें दिन शुक्रवार को अयोध्या धाम से पधारे मनीष शरण जी महाराज ने कहा कि जब भक्तों पर अत्याचार होता है तब निराकार परमात्मा का अवतार होता है।
नराकार कथा को आगे बढ़ाते हुए कहा कि देवकी बासुदेव पर हो रहे अत्याचारों को देखकर भगवान ने देवकी के अष्टम पुत्र के रूप में अवतार लिया। जब भगवान बाल रुप् मे हुए और बसुदेव जी ने उन्हें गोद मे लिया तो वासुदेव जी की हथकड़ी बेड़ी अपने आप ही टूट गई और प्रहरी सो गए, पूरा कारागार शांत हो गया, चारों ओर शांति छा गई, यमुना पार करके बालकृष्ण को नन्द बाबा के यंहा पहुँचाया और वहां उसी समय भगवान की माया ही कन्या रूप में अवतार ले कर आई है, जिसे लेकर वासुदेव जी कारागार में आये और कन्या के कारागार में पहुँचते ही कन्या जोर जोर से रोने लगी, सारे प्रहरी जग गए, हो हल्ला मच गया, कंस ने मारना चाहा, कन्या आकाश में उड़ गई। आकाशवाणी किया कंस तुम्हे मारने वाला ब्रज में जन्म ले चुका है और वही देवी रुपी कन्या विंध्याचल पर्वत पर जाकर विंध्यवासिनी के नाम से प्रतिष्ठित हुई। अंत मे इस कथा का आशय बताते हुए महराज जी ने कहा ज़ब हम भगवान को पा लेते हैं, सामाजिक पारिवारिक बंधन से हम मुक्त हो जाते हैं और जीवन मे शांति छा जाती है, लेकिन जब हम माया को पकड़ते हैं तो पारिवारिक सामाजिक बंधन रुपी हथकड़ी, वेड़ी पड़ा जाती है। सुन्दर सुन्दर भजन सुनकर श्रोता झूम उठे। इस अवसर पर मुख्य यजमान पवन कुमार मिश्र, जिला जज मोटर दावा दुर्घटना अधिकरण गाजीपुर संजय हरि शुक्ल, सदर विधायक भूपेश चौबे, विनोद चौबे, महेंद्र प्रसाद शुक्ल एडवोकेट, राजेश कुमार पाठक एडवोकेट, डॉ सुरेश गुप्ता सहित भक्तगण,माताएं, बहनें, बच्चे मौजूद रहे।