
आदिवासी धर्म कोड शामिल हो जनगणना में, एआईपीएफ ने बभनी में शुरू किया हस्ताक्षर अभिया
तेजस्वी संगठन ट्रस्ट।
चीफ़ ब्यूरो कमलेश पाण्डेय
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आदिवासी धर्म कोड शामिल हो जनगणना में
• एआईपीएफ ने बभनी में शुरू किया हस्ताक्षर अभियान
• आदिवासी स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों को मिले उचित सम्मानबभनी, 30 जनवरी 2026, महात्मा गांधी के शहादत दिवस के अवसर पर ऑल इंडिया पीपुल्स फ्रंट ने बभनी के विभिन्न गांवों में हस्ताक्षर अभियान की आज शुरुआत की है। इस अभियान में अप्रैल माह में शुरू होने जा रही जनगणना में आदिवासी धर्म कोड शामिल करने और आजादी के आंदोलन में शामिल हुए आदिवासी नायकों को उचित सम्मान देने के सवाल को प्रमुखता से उठाया जा रहा है। बभनी ब्लाक के घघरा, चवना और धनखोर आदि गांव से शुरू हुए इस अभियान में ग्रामीणों, समाज के प्रबुद्ध नागरिकों और जनप्रतिनिधियों के हस्ताक्षर कराए जा रहे हैं।
अभियान के बारे में जानकारी देते हुए एआईपीएफ के जिला सचिव इंद्रदेव सिंह खरवार ने बताया कि 1951 तक भारत में हुई जनगणना में आदिवासी धर्म का कोड रहता था। सभी लोग जानते हैं कि आदिवासी समाज की अपनी रीति-नीति, संस्कार, सभ्यता, भाषा, लिपि अलग है। यह मूलतः प्रकृति का उपासक समुदाय है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने विभिन्न निर्णयों में इस बात को स्वीकार किया है कि आदिवासियों का धर्म अलग है। यहां तक की हिंदू उत्तराधिकार कानून में भी आदिवासियों के धर्म को अलग माना गया है। ऐसी स्थिति में पुन: एक बार जनगणना में आदिवासी कोड को शामिल करने की मांग महामहिम राष्ट्रपति महोदया से की जा रही है।
उन्होंने बताया कि आजादी के आंदोलन में बभनी के शनिचर राम खरवार और रामेश्वर खरवार की बड़ी भूमिका थी। जिनको आज तक सम्मान हासिल नहीं हो पाया है। अमृत काल में सरकार से निवेदन है कि वह उनके गांव में उनका स्मारक बनाने, गांव को विकसित करने और उनके परिवारों को उचित सम्मान देने का काम करें।
हस्ताक्षर अभियान में रामजीत खरवार, देव कुमार खरवार, जगरलाल खरवार,
शिवशंकर खरवार, बहादुर सिंह खरवार, देवधारी खरवार, राजाराम, रामसकन, विरेश कुमार, मीनादेवी, रामदेव, रामनरायन खरवार, राजकुमारी आदि लोग शामिल रहे।