
अवैध प्लाटिंग पर कसने लगा शिकंजा, मांगा ले आउट प्लान
तेजस्वी संगठन ट्रस्ट।
चीफ़ ब्यूरो कमलेश पाण्डेय
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कहीं मुख्यालय तो कहीं कस्बे के नजदीक हाईवे से सटी जमीनों पर बेहतर सुविधा का झांसा देकर प्लाटिंग के जरिए खरीदार और सरकार दोनों को चूना लगाया जा रहा है। एक तरफ जहां अच्छे लोकेशन और सुविधाओं का दावा कर खरीदारों को महंगी कीमत पर प्लाट बेचे जा रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ अकृषिक श्रेणी में उपयोग हो रही जमीनों को कृषि श्रेणी के रूप में सीधे किसानों से बैनामा कराकर सरकार को भी हर माह लाखों की चपत लगाई जा रही है। लगातार इस मसले को उठाए जाने के बाद प्रशासन की तरफ से सक्रियता बढ़ा दी गई है। विनियमित क्षेत्र विकास प्राधिकरण ने जहां कथित प्लाटरों से ले आउट प्लान प्रस्तुत करने के लिए कहा है। वहीं आगे से बगैर ले आउट प्लान के कोई प्लाटिंग या प्लाट की बिक्री न होने पाए इसकी चेतावनी दी गई है। चेताने के बाद भी प्लाटिंग कर जमीनों की बिक्री करने वालों पर किस तरह की कानूनी कार्रवाई की जाए, इस पर विचार किया जा रहा है। उधर, डीएम बीएन सिंह की तरफ से इसको लेकर मिल रही शिकायतों के क्रम में तहसील से रिपोर्ट भी तलब की गई है। सूत्रों की मानें तो इसको लेकर जांच में अब तक 17 से अधिक ऐसे प्लाटर चिह्नित किए जा चुके हैं जो इकरारनामा के जरिये सीधे किसानों से जमीन बेचवाकर सरकार को राजस्व की चपत लगाने में जुटे हुए हैं। कहा जा रहा है कि इन पर जल्द ही प्रशासन की तरफ से कार्रवाई देखने को मिल सकती है।