
19 खनन क्षेत्रों की निविदा निरस्त
तेजस्वी संगठन ट्रस्ट।
चीफ़ ब्यूरो कमलेश पाण्डेय
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मिर्जापुर। मिर्जापुर में पत्थर खनन को लेकर बड़ा खेल सामने आया है। जहां एक बड़े खनन व्यवसायी ने सिंडिकेट बनाकर अपने ही लोगों का नाम नीलामी प्रक्रिया में डलवाकर 19 खनन क्षेत्रों की टेंडर प्रक्रिया में नाम शामिल करा लिया। इतना ही नहीं फिर आधार मूल्य से दो-तीन रुपये ज्यादा में ही निविदा प्राप्त कर लिया। एक व्यक्ति ने इसकी अपील आयुक्त न्यायालय में की। जहां मंडलायुक्त बालकृष्ण त्रिपाठी ने अपील में सच्चाई पाते हुए तत्कालीन जिलाधिकारी के आदेश को निरस्त कर दिया है। नए सिरे तथा पारदर्शी ढंग से नीलामी कराने का आदेश दिया है। अनुराग सिंह ने आयुक्त न्यायालय में जिलाधिकारी मिर्जापुर(तत्कालीन) के तीन जून 2025 के पत्रांक-1190 के विरुद्ध अपील की थी। अपीलकर्ता के अधिवक्ता का आरोप था कि तीन जून के पत्रांक के अनुसार ई निविदा पोर्टल पर ई टेंडरिंग के माध्यम से कास्त के 19 क्षेत्रों के लिए खनन निविदा निकाली गई थी। आरोप है कि भू माफियाओं द्वारा किसानों से सस्ती दर से जमीन खरीदकर राजस्व को नुकसान पहुंचाने के इरादे से सिंडिकेट बनाया गया। सैंड स्टोन गिट्टी दर 110 रुपये से मात्र दो तीन रुपये बढ़ा कर टेंडरिंग किया गया। हजारों करोड़ों रुपये के क्षति की योजना बनाई गई। दोनों पक्ष के अधिवक्ताओं को सुनने के बाद आदेश में कहा गया है कि नीलामी तालिका में शामिल सभी खनन क्षेत्रों के लिए 110, 112, 114 व सर्वोच्च बोली 115 रुपये की प्राप्त हुई। तालिका के अनुसार 1,2, 3, 15 व 16 में एक आईपी एड्रेस, विज्ञप्ति क्रमांक 4, 7, 14, 17, , 18, 19 में निविदाकर्ताओं द्वारा एक आईपी एड्रेस से निविदा में प्रतिभाग किया गया। इसी प्रकार 6 व 8 में एक आईपी एड्रेस से इस्तेमाल किया गया। एक ही स्थान से एक ही व्यक्ति से अपने लोगों को नीलामी प्रक्रिया में शामिल करके बोली लगाई। नीलामी प्रक्रिया में सर्वाधिक बोली 115 रुपये की लगाई गई जिसे संतोषजनक व प्रतिस्पर्धात्मक दर नहीं माना जा सकता तथा राजस्व की क्षति हो सकती है। जिलाधिकारी मिर्जापुर के आदेश को निरस्त करते हुए आयुक्त विंध्याचल मंडल पुन: नीलामी की कार्यवाही कराने को कहा गया। नए सिरे से यथाशीघ्र नीलामी कार्यवाही व्यापक प्रचार प्रसार एवं पारदर्शिता के साथ सुनिश्चित कराने का आदेश दिया गया।